ऐसा क्या हुआ हमसे बिछड़ के की तुम अपनी हंसी भूल गए
बेदीली मेरी नहीं थी,फिर क्यों अपनी खुशी भूल गए
परायों को तो क्या खूब याद रखा है तुमने
जो अपने थे,यार तुम वही भूल गए
अरसे हो गए दीदार ए हुस्न किए तेरे
शहर में तो हो पर क्या मेरी गली भूल गए
अब तुझ से ज्यादा मोहब्बत वापस तुझ से भी नहीं होगी
पर तुम उस रकीब के आते ही मेरी कमी भूल गए
और क्या कहते थे,की इश्क़ ईमान से बंधा होता है
ऐसे रुख मोड़ा तुमने,लगा तुम अपनी ज़मीर भूल गए
कभी मेरी हथेलियों को मिलाते थे अपनी हथेली से
शायद अब मेरे साथ लिखी वो तकदीर भूल गए
और पहले तो पाकिस्तान से लड़ लिया करते थे हमसे
ऐसा क्या हो गया कि तुम अपनी कश्मीर भूल गए
तेरी याद आज भी मुझे रात में घंटों जगाती है
पर कोई पूछे तो के दुंगी, यार हीं भूल गए
बेदीली मेरी नहीं थी,फिर क्यों अपनी खुशी भूल गए
परायों को तो क्या खूब याद रखा है तुमने
जो अपने थे,यार तुम वही भूल गए
अरसे हो गए दीदार ए हुस्न किए तेरे
शहर में तो हो पर क्या मेरी गली भूल गए
अब तुझ से ज्यादा मोहब्बत वापस तुझ से भी नहीं होगी
पर तुम उस रकीब के आते ही मेरी कमी भूल गए
और क्या कहते थे,की इश्क़ ईमान से बंधा होता है
ऐसे रुख मोड़ा तुमने,लगा तुम अपनी ज़मीर भूल गए
कभी मेरी हथेलियों को मिलाते थे अपनी हथेली से
शायद अब मेरे साथ लिखी वो तकदीर भूल गए
और पहले तो पाकिस्तान से लड़ लिया करते थे हमसे
ऐसा क्या हो गया कि तुम अपनी कश्मीर भूल गए
तेरी याद आज भी मुझे रात में घंटों जगाती है
पर कोई पूछे तो के दुंगी, यार हीं भूल गए
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