ख़ुद को है पाना।।।

हार नहीं मानी मै तो अभी तक...
जीत नहीं मिली है मुझको...
संघर्ष का है मेला- मेला...

चाह नहीं मै तुझको पा लूं...
चाह नहीं दुनिया को पा लूं..
पाना तो मुझे खुद को है...
तोड़ना है आसमान के तारें...

हो रही मोतियों की बारिश...
आरही आग की अंगारी...

जल रहा है बदन ये मेरा...
आग का है ये मेला - मेला...
पानी से भी प्यास ना बुझे...
 ये है भाओं का मेला...

Comments

  1. माना हार मानना एक सजा है,
    पर कभी हार के देखो, उसमें ही तो जीने का असली मजा है।।

    Anyways,great work...keep it up

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