...

यूं तो समेट लाई हूं गांव से अपने शहर सबकुछ...
पर...
 तेरे नाम का धागा अभी भी उस बरगद पर ही है।।।

Comments

  1. शिकन ना लाना चेहरे पे अपने,मुहाफिज तेरा आज भी यहीं है,
    यकीन है
    कि लौटना होगा तेरा,इसलिए तो नजर आज भी तेरे डगर पर ही है।।

    This was awesome....doing great

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